शास्त्र के साथ शस्त्र ज्ञान की पौराणिक परंपरा को जीवंत करे समाज : सुधीर चंद्रा
बरही। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के 100वें स्थापना दिवस के अवसर पर प्रखंड मैदान, बरही स्थित शिवाजी शाखा के स्वयंसेवक बंधुओं ने परंपरागत शस्त्र पूजन का आयोजन किया। दशहरे के अवसर पर संघ द्वारा 1925 से चली आ रही इस परंपरा को आज भी पूरे विधि-विधान से जीवित रखा गया। कार्यक्रम की शुरुआत सामूहिक गीत से हुई, इसके बाद सुबोध पाण्डेय ने सुभाषित प्रस्तुत किया। नंदकिशोर और बसंत ने एकल गीत गाकर वातावरण को ऊर्जावान बनाया। तत्पश्चात स्वयंसेवकों द्वारा लाए गए पौराणिक अस्त्र-शस्त्रों को भगवा ध्वज के नीचे सजाकर पूजा-अर्चना की गई। मुख्य बौद्धिक कर्ता के रूप में उपस्थित सुधीर चंद्रा ने अपने संबोधन में कहा कि समाज को शास्त्र के साथ शस्त्र ज्ञान की पौराणिक परंपरा को जीवंत रखना चाहिए। हिंदू समाज को अपने आत्मबल को मजबूत कर विजयादशमी के अवसर पर सामाजिक बुराइयों पर विजय प्राप्त करते हुए भारतीय संस्कृति को सशक्त बनाने का संकल्प लेना चाहिए। पूजन कार्यक्रम के अंत में सभी स्वयंसेवकों ने परंपरा के अनुसार गन्ने को शस्त्र से काटकर विजय का प्रतीकात्मक संदेश दिया। इस अवसर पर सैकड़ों स्वयंसेवक गण व स्थानीय लोग मौजूद रहे।





