
समाचार अवलोकन बरही। योगेन्द्र प्रजापति
बरही (हजारीबाग): बरही का नाम अब सिर्फ एक कस्बे तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पोकलेन मशीनों की राजधानी बन चुका है। आंकड़ों के मुताबिक, बरही में 21-22 हजार से ज्यादा पोकलेन मशीनें और उनके आपरेटर सक्रिय हैं। यहां से मशीनें देश के कोने-कोने तक जाती हैं और सड़क, पुल, डैम व बड़े प्रोजेक्ट्स में लगातार योगदान दे रही हैं।
मशीन से लेकर रोजगार तक की कहानी..
एक पोकलेन मशीन की कीमत 60-65 लाख रुपये होती है, लेकिन फाइनेंस कंपनियां सिर्फ 20-25% एडवांस लेकर मशीन उपलब्ध करा देती हैं। यही कारण है कि यहां नई और सेकेंड हैंड दोनों मशीनें बड़ी संख्या में मौजूद हैं। दिलचस्प बात यह है कि एक मशीन में अक्सर चार से ज्यादा पार्टनर मिलकर निवेश करते हैं।
युवाओं के लिए सुनहरा मौका
पोकलेन मशीनों की बढ़ती संख्या ने बरही में रोजगार का नया युग शुरू कर दिया है। हजारों युवाओं को ऑपरेटर, हेल्पर और मैकेनिक के रूप में काम मिला है। रिपेयरिंग व सर्विसिंग सेंटर की मांग बढ़ने से स्थानीय कारोबार भी चमक उठा है। बरही अब सिर्फ एक कस्बा नहीं, बल्कि पूरे झारखंड में ‘पोकलेन हब’ के नाम से पहचाना जाने लगा है।




