एनिमल एक्टिविस्ट मुरारी सिंह ने गिद्धों के संरक्षण, पशुओं की दवाओं के दुष्प्रभाव और सांपों से सुरक्षित रहने के बताए तरीके
बरही। देवचंदा मोड़ स्थित श्रीदस इंटरनेशनल स्कूल में विद्यार्थियों को वन्यजीव संरक्षण और पर्यावरण के प्रति जागरूक करने के उद्देश्य से विशेष जागरूकता सत्र का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में एनिमल एक्टिविस्ट मुरारी सिंह ने विद्यार्थियों को पशु-पक्षियों के महत्व, वन्यजीवों की सुरक्षा और पर्यावरण संतुलन में जीव-जंतुओं की भूमिका के बारे में जानकारी दी।
सत्र के दौरान मुरारी सिंह ने गिद्धों के संरक्षण पर विशेष रूप से चर्चा की। उन्होंने बताया कि गिद्ध मृत पशुओं के अवशेषों को खाकर पर्यावरण को स्वच्छ रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इनकी संख्या में गिरावट पर्यावरणीय संतुलन के लिए चिंता का विषय है। उन्होंने बताया कि पशुओं के उपचार में इस्तेमाल होने वाली डाइक्लोफेनाक जैसी कुछ दवाएं गिद्धों के लिए घातक साबित हो सकती हैं। इसलिए पशुओं के इलाज में सुरक्षित दवाओं का इस्तेमाल और पशु चिकित्सकों की सलाह जरूरी है।
उन्होंने विद्यार्थियों को सांपों के महत्व के बारे में भी बताया। कहा कि सांप खाद्य श्रृंखला का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं और चूहों जैसे जीवों की आबादी को नियंत्रित करने में मदद करते हैं। सांप दिखाई देने पर घबराने या उसे पकड़ने की कोशिश करने के बजाय सुरक्षित दूरी बनाए रखनी चाहिए और प्रशिक्षित सर्प रेस्क्यू टीम की सहायता लेनी चाहिए। केवल रंग या बनावट के आधार पर सांप की पहचान करना भी सुरक्षित नहीं है।
मुरारी सिंह ने गिद्ध, चील और अन्य पशु-पक्षियों के पर्यावरणीय महत्व पर प्रकाश डालते हुए विद्यार्थियों से वन्यजीवों के प्रति संवेदनशील बनने की अपील की। उन्होंने कहा कि प्रत्येक जीव प्रकृति के संतुलन को बनाए रखने में अपनी भूमिका निभाता है। वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास की रक्षा करना और पशु-पक्षियों के साथ संवेदनशील व्यवहार करना सभी की जिम्मेदारी है।

विद्यालय के प्राचार्य कैलाश कुमार ने कहा कि विद्यार्थियों को किताबी ज्ञान के साथ पर्यावरण और समाज से जुड़े वास्तविक मुद्दों की जानकारी देना भी आवश्यक है। ऐसे जागरूकता कार्यक्रम बच्चों में प्रकृति के प्रति सम्मान, संवेदनशीलता और जिम्मेदारी की भावना विकसित करते हैं।
वहीं, स्कूल मैनेजर विकास सिंह ने कहा कि विद्यालय का प्रयास विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के साथ सामाजिक जिम्मेदारियों और जीवनोपयोगी जानकारियों से भी परिचित कराना है। वन्यजीव संरक्षण जैसे विषयों पर विशेषज्ञों से संवाद करने से बच्चों को व्यावहारिक जानकारी मिलती है।
कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों ने वन्यजीव संरक्षण से जुड़े विषयों को उत्सुकता के साथ समझा। सत्र के माध्यम से बच्चों को संदेश दिया गया कि बेजुबान जीवों की रक्षा करना केवल किसी एक व्यक्ति या संगठन का काम नहीं, बल्कि समाज के प्रत्येक सदस्य की जिम्मेदारी है।







