2012 में हुआ था उद्घाटन, अब तक खेल गतिविधियां शुरू नहीं होने से उठ रहे सवाल; खिलाड़ियों को नहीं मिल रहा सुविधा का लाभ
संवाददाता बरही। योगेंद्र प्रजापति

बरही (हजारीबाग): बरही चौक से महज दो किलोमीटर दूर चौकरा टांड में बना इनडोर स्टेडियम आज अपनी बदहाली और उपेक्षा की कहानी बयां कर रहा है। करीब 85 लाख रुपये की लागत से बने इस स्टेडियम का उद्घाटन 10 सितंबर 2012 को तत्कालीन सांसद सह केंद्रीय मंत्री यशवंत सिन्हा ने किया था। लेकिन उद्घाटन के लगभग 14 साल बाद भी यहां खेल गतिविधियों और खिलाड़ियों को मिलने वाली सुविधाओं को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
एनबीसीसी लिमिटेड, रांची द्वारा करीब दो एकड़ जमीन पर निर्मित इस स्टेडियम का उद्देश्य बरही और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों के खिलाड़ियों को बेहतर खेल सुविधाएं उपलब्ध कराना था। यहां बैडमिंटन, टेबल टेनिस सहित अन्य इनडोर खेलों के अभ्यास और प्रशिक्षण की व्यवस्था किए जाने की योजना थी। इससे क्षेत्र के युवाओं को अपनी प्रतिभा निखारने और खेल के क्षेत्र में आगे बढ़ने का अवसर मिलने की उम्मीद थी।
उद्घाटन के बाद भी उद्देश्य अधूरा..
स्थानीय स्तर पर स्टेडियम की उपयोगिता और रखरखाव को लेकर लगातार सवाल उठते रहे हैं। उचित देखरेख के अभाव और खिलाड़ियों की नियमित आवाजाही नहीं होने के कारण स्टेडियम अपने निर्धारित उद्देश्य को पूरा नहीं कर पा रहा है। लाखों रुपये खर्च कर तैयार की गई इस खेल सुविधा का लाभ स्थानीय युवाओं को कितना मिल रहा है, यह जांच का विषय है।
खिलाड़ियों के लिए कब खुलेगा स्टेडियम?
स्टेडियम की वर्तमान स्थिति को लेकर कई सवाल खड़े हो रहे हैं। क्या यहां खिलाड़ियों के नियमित अभ्यास की व्यवस्था है? क्या बैडमिंटन और टेबल टेनिस जैसे खेलों के लिए आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध हैं? करीब 85 लाख रुपये की लागत से बने इस भवन का वर्तमान में किस रूप में उपयोग किया जा रहा है?

विभाग और जनप्रतिनिधियों से पहल की उम्मीद
खेल प्रतिभाओं को आगे बढ़ाने के लिए खेल मैदान और प्रशिक्षण केंद्रों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। ऐसे में बरही के इस इनडोर स्टेडियम को फिर से सक्रिय करने की जरूरत है। संबंधित विभाग और जनप्रतिनिधि इसकी वर्तमान स्थिति का आकलन कर आवश्यक मरम्मत, रखरखाव और नियमित खेल गतिविधियां शुरू कराने की दिशा में पहल करें, ताकि स्थानीय खिलाड़ियों को इसका लाभ मिल सके।
बरही का यह इनडोर स्टेडियम क्षेत्र के युवाओं के लिए खेल के क्षेत्र में आगे बढ़ने की उम्मीद के साथ बनाया गया था। अब सवाल यही है कि करीब 14 साल बाद इस उम्मीद को हकीकत में बदलने के लिए जिम्मेदार विभाग कब पहल करेंगे?






